Wednesday, June 11, 2014

तुम्हारी ये नजरों की शरारतें
तुम्हारी ये चहरे की चमक
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारी ये जुल्फों का साया
तुम्हारी ये कानो की बालियों की खनखनाहट
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारी ये मीठी सी आवाज
तुम्हारे ये  हिलते हुए ओंठ
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये दुपट्टे को हवा में उड़ाना
और फिर नाचते हुए चलना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये प्यार से  रूठना
और फिर रूठ के प्यार जताना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारे ये पास आने के बहाने
और पास आके दूर जाने के नखरे
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये मदमस्त होके चलना
और फिर ये घुंघरू की आवाज
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये जुल्फों का सवारना
और फिर चुपके से देखना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये छूने की कोशिश करना
और फिर सरमा जाना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये ओंठों को भींचना
और फिर सर हिला के जवाब देना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

तुम्हारा ये बात करते-करते ठहर जाना
और फिर मुस्करा जाना
क्या यही चाहता है ये दिल।।

क्या यही चाहता है ये दिल।।




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