Thursday, June 5, 2014

जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।
जिंदगी तुम्हारी कितनी चाहत है आज भी मुझको।

तुम्हारी जुल्फों की छाऊँ में में रहता हूँ ।
तुम्हारी ही खूबसूरती को हर दिन में निहारता हूँ।

जिंदगी तुमसे दूर जाने की सोची कई बार।
पर दूर जाके भी तुम्ही थी मेरे पास।

जब रोता हूँ अकेले में तब भी तुम्ही हो मेरे पास।
जब खुशियों में झूमता हूँ तब भी तुम्ही हो मेरे पास।

हवाओं की हर खुसबू में भी तुम्हारा ही अहसास है।  
चारों ओर के नज़ारे में भी तुम ही तुम हो।

जिंदगी तुम्हारी कितनी चाहत है आज भी मुझको।

फ़िज़ाओं में भी तुम हो घटाओं में भी तुम हो।
अँधेरी रात में भी तुम ही  हो
और दिन के उजाले में भी तुम हो।

जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।

पल-पल तुम्हारा ही साथ है
मेरी हर साँस में भी  तुम हो।
जिंदगी तुम्हे कितना प्यार है मुझसे।

तुम्हारा हर स्पर्श ताज़गी भर देता है मुझमे।
तुम्हारी साँसों की गर्माहट कितनी पसंद है मुझको।
जिंदगी तुम्हारी कितनी चाहत है आज भी मुझको।

हर दुःख दर्द को मेरे जिंदगी तुम्ही झेलती हो मेरे साथ साथ।
जिंदगी तुम्हे कितना प्यार है मुझसे।
जिंदगी तुम्हारी कितनी चाहत है आज भी मुझको।

तुम्हारे साथ ही जीना और तुम्हारे साथ ही मारना है।
जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।  

मेरी गलतियों पे कभी तुम हंसती और कभी तुम मुझे सबक सिखाती।
जिंदगी तुम्हे कितना प्यार है मुझसे।

तुम्हारे आँचल में में पलता हूँ।
तुम्हारी ममता की छाऊँ में में जीता हूँ।
जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।

जिंदगी तुम्हारी कितनी चाहत है आज भी मुझको।

जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।
जिंदगी तुम कितनी हसीन हो।

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