Thursday, April 10, 2014


कहीं ये एक तूफान कि आहट तो नहीं है ,,

हर ओर एक फुसफुसाहट सी हो रही है..
सोचा में भी बता दूँ  तुमे क्या आवाज है ये।


मन के सवाल और दिल के अरमान कुछ कह रहे हैं ,
पता नहीं क्यों ये भी इशारों में कह रहे हैं ।


ख़ामोशी सी  पसर जाती है जब ये कहना शुरू करते हैं,
कानो पे जोर दे के  कुछ सुनायी देता है पर वो केवल एक गूंज होती है,

आशियानों के गलियारो में भी आजकल एक नया शोर है,
कहीं ये तुम्हारे हमारे साथ होने का आगाज तो नहीं है।

कहीं ये एक तूफान कि आहट तो नहीं है ,,

एक आहट जो बिना शोर किये आगे बड़ी चली जा रही है ,
सोचा तुम से पूछ लूं , तुम्ही से सुन लूं इस आहट कि कहानी,

पता नहीं क्यों ज़बान खामोश सी हो जाती है,
पता नहीं क्यों ये भी इशारो में पूछ रही है।

पता नहीं क्यों तुम भी खामोश रहकर इशारों में कहानी सुना रही हो,
कानो पे जोर दे के  कुछ सुनायी देता है पर वो केवल एक गूंज होती है।

ये केंसी ख़ामोशी है , ये केंसी गूंज है , ये केंसा शोर है।
कहीं ये तुम्हारे हमारे साथ होने का आगाज तो नहीं है।

कहीं ये एक तूफान कि आहट तो नहीं है। ।
कहीं ये एक तूफान कि आहट तो नहीं है। ।

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