Sunday, March 4, 2012

"देखे थे कई सपने पर ना पता था जाना कहाँ था ,
देखे थे कई रास्ते पर ना पता था कितनी दूर हैं,"

एक ख्वाबों की दुनिया बसी थी इन आँखों में , 
एक ख्वाब  एक आस बसी थी इन आँखों में , 
एक जशन एक ख़ुशी बसी थी इन आँखों में ,
हर पल धडकती एक जान बसी थी इन आँखों में.
हजारों सपने सजोयें थे इन आँखों में,
हर ख्वाब को अपने आंसुओं से सींचा था इन आँखों ने,
आंधी तूफान में हर ख्वाब को पलकों तले छुपाकर बचाया था इन आँखों ने.

दुनिया के झूठेपन में टूट कर बिखर गए सब ख्वाब,
ये सूखी  आँखें अहसाय होकर देखती रह गयी,


"फिर से संजो रही हर एक बिखरे ख्वाब को ये आँखें,
एक नयी आस जगी है फिर से एक नया ख्वाब पला है फिर से.
एक जशन का माहोल बना है फिर से"



2 comments:

Rekha said...

Hey pawan good one. Keep writing - Rekha

Pawan Purohit said...

Yes

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