Friday, April 29, 2011

तेरी हर बात समझ सकता हूँ में,

इस चेहरे के पीछे छुपा हर दर्द समझ सकता हूँ में,
इस चेहरे के पीछे छुपा हर गम  समझ सकता हूँ में,

रात भर जगे रहने की बात समझ सकता हूँ में..
तेरी इन् तनहाइयों की आहट को समझ सकता हूँ में,
इन्तजार में सुर्ख आँखों  की बात समझ सकता हूँ में,

तेरी हर बात समझ सकता हूँ में.........

बिन कहे तेरी हर शिकायत को समझ सकता हूँ में ,
तेरी यादों  के साथ समय बिताना समझ सकता हूँ में ,
सब कुछ छोड़कर वीरान रह की ओर टकटकी लगाना समझ सकता हूँ में ,

तेरी हर बात समझ सकता हूँ में.............
तेरा छुप - छुप कर रोने की बात समझ सकता हूँ में,
हिलते ओंठो की आवाज सुन सकता हूँ में ,
 उनसुलझे ल्ब्ज्हों की बात समझ सकता हूँ में,
तेरी तनहाइयों को समझ सकता हूँ में....

तेरी हर बात समझ सकता हूँ....
तेरी हर बात समझ सकता हूँ में......

2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी प्रस्तुति ...काफी समझदार हैं ...

पवन पुरोहित said...

Thanks

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