Saturday, March 13, 2010

ये दुनिया, ये मंजर सब बेमान हुए ,

सब तेरी मोहब्बत  में कुर्बान  हुए.

 तुमने साथ छोड़ दिया तो क्या हुआ ,
पास आने के बहाने बहुत हैं .
तुम रूठ गए तो क्या हुआ ,
मुस्कराने के बहाने बहुत हैं ,
माना की गम दिए तुमे बहुत सारे ,
पर गम भुलाने के बहाने बहुत हैं ,
माना की तुम मेरी जिंदगी थी ,
पर जिंदगी जीने के बहाने बहुत  हैं ,
माना की तुम एक हंसी थी इन लबो की ,
पर हंसने  के बहाने बहुत हैं .
माना की दिन की शुरुवात तुमसे थी ,
पर दिन शुरू करने के बहाने बहुत  हैं
 माना की अब तुम याद ना करो कभी ,
पर याद  आने  के बहाने  बहुत हैं ,
माना की तुम अकेले कर दो हमें ,
पर भीड़ में खो जाने के बहाने बहुत हैं ,
माना की तुम सब रिश्ते तोड़ दो हमसे ,
पर तुम पर कुर्बान होने के बहाने  बहुत हैं.

हसरते पूरी कर दी थी तेरे साथ ने ,

जिंदगी हसीन कर दी थी तेरे हर अहसास ने

1 comments:

मदन मोहन सक्सेना said...

प्रभाबशाली रचना। बधाई।
कभी यहाँ भी पधारें।
सादर मदन
http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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