Thursday, February 4, 2010

क्यों ये नफ़रत भरी है दिल में, क्यों एक आग सी लगी है दिल में ,
क्यों रूठे हम एक दूजे से , क्यों जी  रहे हैं  हम  मर - मर के.
हम तो चूर हैं आज भी तेरे नसे में ,
हम तो फंसे हैं आज भी तेरे हुस्न में ,
हम तो डूबे हैं आज भी तेरे ख्यालों  में  ,
तरसतें हैं आज भी सुनने को तेरी आवाज ,
तरसतें हैं आज भी संग तेरे उन यादों को ,
हमने तो किया था अपने आप को तेरे हवाले ,
क्यों तुम निभा ना पायी उन वादों को  क्यों ,
कहा ना कुछ भी तेरे लिए हमने   ,
क्यों तुमने कह दिया एक पल में वो  सब कुछ ,
बिन सोचे समझे हम भी तुमसे दूर हो  गए ,
बेवफा खिताब जो दे दिया था तुमने हमको ,
हम आज भी समझ ना पाए हम बेवफा या तुम,
कह ना पाए हम तेरे सामने कभी कुछ भी  ,
क्यों सुनते रहे हम केवल  तेरी उन बातों को ,
क्यों भूल गयी तुम उन आँखों की बातों को,
क्यों भूल गयी तुम उन सारी मुलाकातों को ,
क्यों रूठ  गयी तुम मुझसे........ क्यों 
ना भूल पाए हम तेरी यादों को  अभी भी ,
अब मेरी साँसों के साथ ही तेरी यादें जायेंगी.
याद है आज भी वो कसम......................
याद है आज भी तुम ...................

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