Monday, February 1, 2010

साथी तू कहाँ है , ऐ  मेरे  हमसफ़र  तू कहाँ है ,
ढूनते  फिरते हैं  हम तुमको सब जगह,
आँखों  में बनाते हैं तेरी वो बिन देखी तस्वीर,
ऐ  मेरे  हमसफ़र  तू कहाँ है ....................
सोचते हैं ऐंसी दिखती कभी सोचते हैं वेंसे दिखती,
ऐंसी होगी की वेंसी होगी ना जाने केंसी होगी तू ,
वो मेरे आँखों की तस्वीर ना जाने केंसी होगी तू ,

होगी रूप की माया तू, या होगी चाँद सी छाया तू ,
होगी बूंद तू ओंस की, या होगी धारा तू गंगा- जमुना जेंसी,
होगी सूरज जेंसा तेज जेंसी तू , या होगी बर्फ जेंसी नमी तू ,
होगी फूल जेंसी प्यारी तू  , या होगी धूप जेंसी न्यारी तू ,
होगी वो छठा निराली , या होगी वो चंचल मन वाली ,
ना जाने केंसी होगी वो मेरे  सपनों की प्यारी  ,
                            ऐंसी होगी की वेंसी होगी ना जाने केंसी होगी वो ,
                           वो मेरे आँखों की तस्वीर ना जाने केंसी होगी तू .
रूप का खाजाना होगी तू , या प्यार का सागर होगी तू ,
होगी तू पानी की फुवार जेंसी , या होगी बादलों की बोछार जेंसी ,
ना जाने केंसी होगी तू.......................
होगी श्याम सी धूप जेंसी तू, या होगी सुबह की भोर जेंसी तू ,
होगी वो मदमस्त हवा तू , या होगी वो काली घटा तू ,
होगी तू मोरनी जेंसी , या होगी तू शेरनी जेंसी ,
ना जाने केंसी होगी वो मेरे सपनों की प्यारी ,
होगी छुईमुई जेंसी सर्मीली तू , या होगी बेल जेंसी तू आसमा छू लेने वाली ,
तू बस जाए मेरे मन में या बस जाए सबके दिल में ,
चारों और प्यार का बयार होगी तू  ना जाने केंसी होगी तू..
ना जाने केंसी होगी तू .........................
रूप का खजाना वो मेरे सपनों  की रानी केंसी होगी तू .....................
वो मेरे आँखों की तस्वीर ना जाने केंसी होगी तू ...........
ना जाने केंसी होगी तू................

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