Friday, January 29, 2010

डूबे हैं उन ख्यालों में , कर रहे हैं याद उन लम्हों को ,
याद कर रहे उन यादों को , सोच रहे हैं आने वाली बातों को ,

जी है हमने थोड़ी सी जिंदगी अभी , मिले हैं कई हमसफ़र इस जहां में ,
कोई साथ दे गया पल भर का तो  कोई साथ चल रहा है अभी भी ,
कोई छोड़ गया बीच मंझदार में तो कोई पार करा गया उस मंझदार में भी ,
कोई दे गया कई यादें तो कोई याद दिला गया उन यादों को ,
कोई कर गया कई वादे तो कोई भुला गया उन वादों को ,

हर एक बस इसी  कोशिश में यहाँ करें किस तरह अकेला हमको  ,
करे किस तरह विवश दुनिया छोड़ देने पर....
ना रही अब कुछ भी पसंद अब मेरी , कर दिया विवश छोड़ने पर दुनिया  ने ,
सुन दुनिया के  उन तानो को कोसते हैं हम अपने आप को ,
दुखी हो उठते  हैं  अपने  इस नसीब पर और फिर भूल जातें उन दुख दर्दों  को,
करते हैं फिर कोशिश खुश रहने की साथ इस दुनिया के...........

डर लगता है सोच कर कहीं हो ना जाएँ तन्हा हम,
कहीं छोड़ ना दे सब साथ मेरा.......
याद आती है  अपनो कि, याद आती है उन दोस्तों कि,
जो थे हर दुःख दर्द में साथ मेरे.
याद आती है उस घर कि जहां छोड़ आया बचपन अपना.
याद आती है हर एक कि और यादों ही यादों ही यादों में निकल आतें हैं आँसू,

रोते हैं अकेले में जाके छुप कर सब लोगो से,
डरते हैं कोई देख ना ले रोते हुए हमें, कहीं फिर बन ना जायें उनके तानो का निशाना हम ,
ना मांग रहे हम किसी कुछ , बस मांग रहे हैं तो साथ उनका ,
मांग रहे एक वादा उन से , ना जाना छोड़कर मुझे इस इस तन्हाई में ,
अब तो याहें ही यादें रह गयी , याहों के सहारे  जीना है ,
और यादें ही याद आनी  हैं...................

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