Wednesday, January 13, 2010

सुन के इस दुनिया के दुःख दर्द , हुए विवश सोचने पर हम,
सुन पीड़ा किसी कि , दुखी हो उडे  हम ,
सुन ख़ुशी के वो पल किसी के ,खुश हो उडे  हम ,
ना जाने क्यों सोचने पर विवश हो उडे हम ,
ना जाने क्यों सुख - दुःख के फेर में फंस पड़े हम ,
ना जाने क्यों..........................
लगा ये दुनिया बन गयी है दुःख दर्द का सागर ,
जिसमे तैरते जा रहे हैं हम ,
फिर सोच पड़े देख इस दुनिया का मंजर ,
ये है एक तमाशा और तमाशा देखने वाले बन गए हैं हम,
है सबकी एक कहानी इधर ,
कोई याद कर रहा है अपनो को तो कोई भुला रहा है अपनो को ,
कोई उड़ चला आसमान में , तो कोई सिमट गया इस जमी में ,
कोई है तन्हा इधर तो कोई ढूँढ रहा तन्हाई इधर ,
कोई भुला रहा सारे दुःख दर्द तो कोई कुरेद रहा है उन जख्मो को,
हुए सोचने पर विवश हम...................
ये दुनिया है एक तमाशा और तमाशा देखने वाले बन गए हैं हम.............

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